40 वर्ष के आसपास अधिक वजन होने से किडनी कैंसर (Kidney Cancer) का खतरा जाना गया है।
लेकिन एक नए स्टडी ने कहा है कि विभिन्न आयु में अधिक वजन रहने से भी इस घातक बीमारी के होने की संभावना बढ़ती है।
इस विषय पर यूएस वैज्ञानिकों की एक टीम ने अमेरिकन कैंसर सोसाइटी के जर्नल CANCER में खुलासा किया है।
उन्होंने वजन और किडनी कैंसर संबंधों का आकलन करने के लिए 204,364 इंसानों की स्वास्थ्य जानकारी का विश्लेषण किया था।
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तभी 62 वर्षीय उन इंसानों का 18, 35 और 50 वर्ष में वजन जानने के लिए पिछला बीएमआई रिकॉर्ड भी देखा गया था।
टीम ने उनमें किडनी कैंसर या रीनल सेल कार्सिनोमा (RCC) के 1425 मामले पाए, जिनमें 583 स्टेज IV और 339 लास्ट स्टेज RCC थे।
RCC के विभिन्न सबटाइप में क्लियर सेल RCC (541 मरीज), पैपिलरी RCC (146 मरीज) और क्रोमोफोब RCC (64 मरीज) शामिल थे।
किसी भी उम्र में हाई BMI होने से सभी RCC और सबटाइप (क्रोमोफोब RCC छोड़कर) का अधिक खतरा था।
टीम ने बताया कि BMI में प्रत्येक 5-इकाई की वृद्धि से सभी प्रकार के RCC का 10 से 40% अधिक जोखिम था।
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सामान्य BMI की तुलना में वयस्कता के दौरान, अधिक वजन या मोटापा होने से भी उपरोक्त खतरा जाना गया।
लंबे समय तक अधिक वजन रहने से, पैपिलरी और क्रोमोफोब RCC को छोड़कर, सभी RCC का अधिक खतरा था।
हालांकि, बढ़ती उम्र में BMI कम से कम 10% घटने पर RCC के खतरे में कमी का अनुमान रहा।
खासकर, 18 से 35 की उम्र और 50 वर्ष के बाद वजन घटाने से RCC होने के खतरे में क्रमश: 21 और 28% कमी मानी गई।
बता दें कि किडनी की छोटी नलिकाओं में बनने वाला रीनल सेल कार्सिनोमा (RCC) सबसे आम कैंसर है।
यह एक घातक ट्यूमर है और किडनी के सभी घातक रोगों में 90% से ज़्यादा का कारण बनता है।
टीम ने कहा कि RCC का खतरा कम करने के लिए जीवन भर स्वस्थ वजन बनाए रखना अति आवश्यक है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जीवन के आखरी सालों में भी वजन घटाने से सुरक्षात्मक लाभ मिल सकते हैं।
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