एक नई स्टडी ने हाई ब्लड प्रेशर (Hypertension) के कारण किडनी (Kidney) स्वास्थ्य में गिरावट बताई है।
वियना मेडिकल यूनिवर्सिटी की स्टडी में, हाई बीपी और टाइप 2 डायबिटीज मरीजों की किडनी पर गंभीर दुष्प्रभाव मिले है।
बता दें कि हाई ब्लड प्रेशर और टाइप 2 डायबिटीज क्रोनिक किडनी रोग के सबसे आम कारणों में से हैं।
इसलिए, स्टडी टीम ने किडनी की बेहतरी के लिए हाई बीपी का जल्द पता लगाने और लगातार इलाज ज़रूरी कहा है।
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स्टडी में पाया गया कि हाई बीपी की समस्या डायबिटीज के बिना भी पोडोसाइट्स (podocytes) में असामान्यताएं पैदा कर सकती है।
पोडोसाइट्स ऐसी विशेष कोशिकाएं है जो किडनी की फिल्टर करने की क्षमता के रखरखाव के लिए महत्वपूर्ण होती है।
वर्तमान जानकारी के लिए, टीम ने कुल 99 रोगियों के किडनी टिश्यू का विश्लेषण किया था।
ये मरीज हाई बीपी (47) और हाई बीपी तथा डायबिटीज (32) से पीड़ित थे या उन्हें दोनों में से कोई भी समस्या (20) नहीं थी।
स्टडी में ट्यूमर नेफ्रेक्टोमी (Tumor nephrectomies) से अप्रभावित किडनी टिश्यू सैंपल की जांच की गई थी।
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नेफ्रेक्टोमी सर्जरी में किडनी ट्यूमर के इलाज के लिए किडनी को पूर्णतया या आंशिक रूप से निकालना पड़ता है।
टीम ने आधुनिक तकनीकों का उपयोग करने के बाद किडनी स्वास्थ्य और कार्यों का विश्लेषण किया।
नतीजों में पता चला कि हाई बीपी वालों में स्वस्थ लोगों की अपेक्षा पोडोसाइट्स कोशिकाएं कम और बीमार थी।
बिना डायबिटीज के हुए ये परिवर्तन, बिगड़े हुए किडनी फंक्शन का संकेत देने वाले थे।
माना गया कि हाई बीपी शुरुआत और लक्षण प्रकट होने से पहले ही किडनी को क्षति पहुंचा सकता है।
गौरतलब है कि हाई बीपी के 46% पीड़ितों को पता ही नहीं होता कि उन्हें यह बीमारी है।
ब्लड प्रेशर 180/120 mmHg या अधिक होने पर सिरदर्द, तेज़ धड़कन या नाक से खून आना जैसे लक्षण हो सकते हैं।
अधिक जानकारी हाइपरटेंशन जर्नल में प्रकाशित स्टडी से प्राप्त की जा सकती है।
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