Chewing gum sheds microplastics: हम रोजाना प्लास्टिक से बने कई प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करते है।
ऐसे में हमारे शरीर का माइक्रोप्लास्टिक जैसे अति महीन प्लास्टिक कणों के संपर्क में आना लाजमी है।
सिंथेटिक पॉलिमर से बने माइक्रोप्लास्टिक पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य के लिए ज़हर माने गए है।
इस विषय पर हुई एक नई स्टडी ने च्युइंग गम से भी शरीर में माइक्रोप्लास्टिक का पहुंचना संभव बताया है।
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स्टडी के मुताबिक, च्युइंग गम इंसानी लार में हज़ारों माइक्रोप्लास्टिक छोड़ सकता है।
बता दें कि दुनिया भर में च्युइंग गम का इस्तेमाल मौखिक स्वास्थ्य बढ़ाने के लिए किया जाता है।
इसे बनाने में इस्तेमाल हुए पौधों के या सिंथेटिक प्लास्टिक पॉलिमर से माइक्रोप्लास्टिक शरीर में घुस जाते है।
ये माइक्रोप्लास्टिक च्युइंग गम चबाने के दौरान बनने वाली लार के ज़रिए निगले जा सकते हैं।
एक व्यक्ति गम से कितने माइक्रोप्लास्टिक निगल सकता है, स्टडी के यूएस वैज्ञानिक इसका सही पता नहीं लगा सके है।
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च्युइंग गम सेवन के दौरान निकलने वाले माइक्रोप्लास्टिक के लिए उन्होंने बाजार में उपलब्ध ब्रांड लैब में टेस्ट किए थे।
वहां 10 प्राकृतिक और सिंथेटिक गम को एक व्यक्ति ने 2 से लेकर 20 मिनट तक चबाया।
च्युइंग गम चबाने के दौरान पैदा हुई लार के सैंपल को वैज्ञानिको ने जाँच के लिए एकत्र किया।
माइक्रोप्लास्टिक की मात्रा और विश्लेषण के लिए FTIR माइक्रोस्कोप और स्मार्टफोन का उपयोग किया गया।
परिणामों से पता चला कि प्रत्येक ग्राम गम 637 माइक्रोप्लास्टिक कण छोड़ सकता है, जिसमें से 94% चबाने के पहले 8 मिनट के भीतर निकल जाते हैं।
दिलचस्प बात यह थी कि सिंथेटिक गम ने प्राकृतिक (पौधे-आधारित) गम के बराबर मात्रा में माइक्रोप्लास्टिक छोड़ा।
अधिकांश माइक्रोप्लास्टिक का औसत आकार 45.4 µm था और वैज्ञानिकों ने इससे भी छोटे कण संभव बताए।
इंसानी लार में चार मुख्य प्लास्टिक पॉलिमर पाए गए, जिनमें पॉलीओलेफ़िन सबसे आम थे।
पॉलीओलेफ़िन प्लास्टिक का एक समूह है जिसमें पॉलीइथिलीन और पॉलीप्रोपाइलीन शामिल हैं।
निष्कर्ष बताते है कि च्युइंग गम चबाने से शरीर में माइक्रोप्लास्टिक जा सकते है, जिससे स्वास्थ्य बिगड़ सकता है।
वैज्ञानिकों ने बताया कि चबाने के पहले 2 मिनट के भीतर ही अधिकांश माइक्रोप्लास्टिक गम से अलग हो गए थे।
लेकिन वे लार में मौजूद एंजाइम के कारण नहीं निकल सके, बल्कि चबाने की वजह से टुकड़े-टुकड़े हो गए।
अगर लोग च्युइंग गम से माइक्रोप्लास्टिक का संपर्क कम करना चाहते हैं, तो उन्हें इसे अधिक समय तक चबाना चाहिए।
इसके अलावा, चबाए गए गम को बाहर खुले में फेंकने या दीवार पर न चिपकाने से बचना चाहिए।
क्योंकि ठीक से निपटान नहीं किया गया गम पर्यावरण के लिए प्लास्टिक प्रदूषण का एक और स्रोत हो सकता है।
इस स्टडी को अमेरिकन केमिकल सोसाइटी (ACS) की जल्द होने वाली मीटिंग में पेश किया जाएगा।