Camel Milk Benefits: ऑस्ट्रेलिया की एक रिसर्च ने ऊंटनी को गाय आधारित डेयरी का अच्छा विकल्प कहा है।
एडिथ कोवान यूनिवर्सिटी की रिसर्च में गाय की तुलना में ऊंटनी के दूध में अधिक प्राकृतिक बायोएक्टिव पेप्टाइड्स मिले है।
ये बायोएक्टिव पेप्टाइड्स कुछ रोगजनकों को रोक सकते हैं। इससे आंत स्वस्थ और हृदय रोग विकास का जोखिम कम हो सकता है।
इसके अलावा, ऊंटनी के दूध से पाचन क्रिया में वृद्धि की भी संभावना है। इससे एलर्जी, बीपी और डायबिटीज में कमी का अनुमान है।
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हालांकि, रिसर्चर्स ने इन बायोएक्टिव पेप्टाइड्स की सटीक क्षमता जानने के लिए अभी और परीक्षण की आवश्यकता कही है।
रिसर्च में पाया गया कि ऊंटनी के दूध में प्रमुख दूध एलर्जेन β-लैक्टोग्लोबुलिन (β-Lg) नहीं होता है।
इसलिए यह β-Lg एलर्जी वाले डेयरी उपभोगकर्ताओं को गाय के दूध का विकल्प देता है।
पहली की स्टडीज ने भी ऊंटनी के दूध में लैक्टोज का स्तर गाय के दूध की तुलना में कम बताया था।
रोजाना 28 लीटर तक दूध देने वाली डेयरी गायों के मुकाबले ऊंटनियां आमतौर पर रोजाना लगभग 5 लीटर दूध देती हैं।
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गाय के दूध में लगभग 85% से 87% पानी होता है। इसमें 3.8% से 5.5% फैट, 2.9% से 3.5% प्रोटीन और 4.6% लैक्टोज होता है।
इसके विपरीत, गाय की अपेक्षा ऊंटनी के दूध में लगभग 87% से 90% पानी होता है।
इसमें प्रोटीन 2.15% से 4.90% तक, फैट 1.2% से 4.5% तक और लैक्टोज 3.5% से 4.5% के बीच होता है।
वर्तमान में, वैश्विक स्तर पर दूध-उत्पादन का लगभग 81% गायों से प्राप्त होता है।
जबकि ऊंटनी के दूध का उत्पादन भैंसों, बकरियों और भेड़ों के बाद पांचवें स्थान पर आता है।
यानी वैश्विक स्तर पर ऊंटनी के दूध का वर्तमान दूध-उत्पादन में केवल 0.4% हिस्सा है।
रिसर्च के मुताबिक, अब ऊंटनी का दूध वैश्विक स्तर पर ध्यान आकर्षित कर रहा है।
इसका एक प्रमुख कारण तेजी से बदलती पर्यावरणीय परिस्थितियाँ भी हैं।
शुष्क या अर्ध-शुष्क क्षेत्र मवेशी पालन के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं, लेकिन ऊंटों के अनुकूल हैं।
अधिक जानकारी के लिए, फ़ूड केमिस्ट्री जर्नल में प्रकाशित रिपोर्ट पढ़ सकते है।
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