Lung Cancer: एक अंतर्राष्ट्रीय स्टडी ने फेफड़ों के कैंसर से जुड़े मामलों में वृद्धि बताई है।
स्टडी के खुलासे चौंकाने वाले है क्योंकि उपरोक्त कैंसर स्मोकिंग न करने वालों को ज्यादा हुआ है।
वायु प्रदूषण के कारण धूम्रपान न करने वालों में फेफड़े के कैंसर का सबसे आम रूप बढ़ता मिला है।
नतीजों के लिए, दुनिया भर की विभिन्न आबादी में फेफड़ों के कैंसर की घटनाओं का आकलन किया गया था।
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प्रदूषण संबंधित नई स्टडी में दक्षिण-पूर्व एशिया के लोग, विशेषकर महिलाएं इससे अधिक पीड़ित जानी गई।
स्टडी में विश्व स्वास्थ्य संगठन सहित अन्य मॉनिटरों से प्राप्त कैंसर आंकड़ों की जांच की गई थी।
फेफड़ों के कैंसर एडेनोकार्सिनोमा से साल 2022 में 25 लाख लोगों के प्रभावित होने का अनुमान रहा।
उनमें से अधिकांश पुरुष थे, लेकिन महिलाओं में भी लगभग दस लाख मामले बढ़ने की संभावना थी।
अनुमान के मुताबिक, एडेनोकार्सिनोमा (Adenocarcinoma) कैंसर से 185 देशों की महिलाएं पीड़ित थी।
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यह कैंसर फेफड़ों, कोलन व स्तन जैसे अंगों के अंदर की श्लेष्म ग्रंथियों (Mucous glands) में शुरू होता है।
2020 से 2022 तक पुरुषों और महिलाओं में वायु प्रदूषण अधिकता से एडेनोकार्सिनोमा कैंसर वृद्धि जानी गई।
विश्लेषण ने दुनिया भर में कभी धूम्रपान न करने वालों में फेफड़ों के इस कैंसर के 53 से 70% मामले बताए।
महिलाओं के कैंसर से प्रभावित होने का स्तर उच्चतम था। उनमें इस कैंसर के 10 में से लगभग छह मामले मिले।
स्टडी ने दुनिया भर में स्मोकिंग कम होने के बावजूद लोगों में एडेनोकार्सिनोमा कैंसर के मामलों में बढ़त कही है।
स्मोकिंग न करने वालों में फेफड़ों का कैंसर, दुनिया भर में कैंसर से संबंधित मौत का पाँचवाँ प्रमुख कारण है।
यह कैंसर विशेषकर एडेनोकार्सिनोमा के रूप में सबसे अधिक महिलाओं और एशियाई आबादी में होता है।
स्टडी ने बताया कि वायु प्रदूषण से जुड़े एडेनोकार्सिनोमा की अधिकता विशेष रूप से चीन में मिली है।
घरों में हीटिंग और खाना पकाने के ईंधन से चीनी महिलाओं में फेफड़े के कैंसर का खतरा हो सकता है।
फ्रांस और चीन के स्वास्थ्य वैज्ञानिकों की यह साझा स्टडी, हाल ही में लैंसेट रेस्पिरेटरी मेडिसिन जर्नल में प्रकाशित हुई है।
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