Ultra-processed foods: दुनिया भर में अल्ट्रा प्रोसेस्ड फ़ूड यानी फैक्ट्रियों में बने खाने की खपत में वृद्धि हुई है।
इनमें चिप्स, सॉफ्ट ड्रिंक, इंस्टेंट नूडल्स, बिस्कुट, रेडी-टू-ईट मील, बर्गर, नमकीन स्नैक्स आदि प्रमुख है।
ऐसे खाने को स्वादिष्ट और वर्षों तक ताजा रखने के लिए तेज नमक, मीठा, चिकनाई और कई केमिकल डाले जाते है।
अब एक ऑस्ट्रेलियाई यूनिवर्सिटी के नेतृत्व में हुई स्टडी ने ऐसे खान-पान से बायोलॉजिकल उम्र (Biological ageing) में वृद्धि बताई है।
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बायोलॉजिकल उम्र हमारे शरीर की कोशिकाओं (Cells) और ऊतकों (Tissue) की उम्र होती है।
जबकि क्रोनोलॉजिकल उम्र (Chronological age) का निर्धारण हमारी जन्म तिथि और वर्ष से किया जाता है।
स्वस्थ लाइफस्टाइल जीने वालों की बायोलॉजिकल उम्र उनकी क्रोनोलॉजिकल उम्र से कम हो सकती है।
लेकिन अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फ़ूड अधिक खाने से जुड़ी खराब लाइफस्टाइल बायोलॉजिकल उम्र में तेजी लाती है।
ज्यादा जानकारी 2003 से 2010 तक चले एक हेल्थ सर्वे में शामिल 20 से 79 वर्षीय पुरुषों और महिलाओं से मिली थी।
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उन 16055 इंसानों की जांच में Ultra processed food (UPF) सेवन वृद्धि व बायोलॉजिकल उम्र के बीच एक महत्वपूर्ण संबंध मिला।
UPF की खपत में हर 10% की वृद्धि से क्रोनोलॉजिकल की अपेक्षा बायोलॉजिकल उम्र बढ़ने की प्रक्रिया दो महीने से अधिक थी।
यानी जंक फ़ूड अधिक खाने वाले अपनी वास्तविक उम्र की अपेक्षा दो महीने ज्यादा बूढ़े हो गए थे।
इस दुष्प्रभाव के पीछे UPF के कम पोषक तत्व और हानिकारक केमिकल्स की अधिकता जैसे कारण हो सकते थे।
बचाव के लिए रिसर्चर्स ने अधिक फल-सब्जियां, घर के भोजन और कम जंक फ़ूड खाने की सलाह दी।
अधिक जानकारी Age and Ageing जर्नल में छपी रिपोर्ट से मिल सकती है।