सप्ताह में कम से कम एक बार अपने दांतों को फ़्लॉस (Flossing) करने से स्ट्रोक (Stroke) का खतरा कम हो सकता है।
यह स्ट्रोक दिमाग में खून की रुकावट और अनियमित धड़कनों (Atrial fibrillation) के कारण होता है।
नई रोचक जानकारी अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के एक सम्मेलन में पेश होने वाली स्टडी से मिली है।
इस सम्मेलन में स्ट्रोक व दिमागी स्वास्थ्य से जुड़े दुनिया भर के वैज्ञानिक और चिकित्सक शामिल होंगे।
- Advertisement -
फ़्लॉसिंग (Flossing) दांतों के बीच और मसूड़ों से भोजन के कणों को निकालने की प्रक्रिया है।
यह प्रक्रिया दांतों के बीच एवं मसूड़ों की रेखा से टार्टर और प्लाक हटाने में भी सहायक है।
इसके द्वारा कैविटी (दांतों में छेद) और मसूड़ों की बीमारी रोकने में मदद मिलती है।
हालाँकि, स्टडी ने स्ट्रोक रोकथाम में डेंटल फ़्लॉसिंग को ही अकेले प्रभावी नहीं कहा है।
स्टडी के मुताबिक, डेंटल फ़्लॉसिंग सूजन से जुड़े मुँह के संक्रमण और मसूड़ों की बीमारी घटाती है।
- Advertisement -
क्योंकि सूजन स्ट्रोक के जोखिम को बढ़ाती है, इसलिए नियमित फ़्लॉसिंग से स्ट्रोक और एट्रियल फ़िब्रिलेशन (AFib) का खतरा घट सकता है।
हालांकि, फ़्लॉसिंग के लाभ दाँत ब्रश करने और अन्य मौखिक स्वच्छता उपायों से अलग है।
6,278 लोगों की जांच में, नियमित फ़्लॉसिंग वालों को इस्केमिक स्ट्रोक, कार्डियोएम्बोलिक स्ट्रोक और AFib का जोखिम क्रमश: 22%, 44% व 12% कम था।
नतीजों में, फ़्लॉसिंग की आवृत्ति बढ़ाने से स्ट्रोक के जोखिम में कमी की संभावना अधिक पाई गई।
इस बारे में अधिक जानकारी के लिए, लिंक पर क्लिक करें।
Also Read: घर बैठे ही जांच सकते है दांतों और मसूड़ों का स्वास्थ्य