Obesity and Alzheimer’s: एक नई स्टडी ने मोटापा प्रभावितों में अल्जाइमर रोग का विकास जल्दी बताया है।
नतीजों में उनके शरीर का एक ‘खास’ फैट अल्जाइमर करने वाले प्रोटीनों से जुड़ा मिला है।
इस कारण मोटापे वालों में डिमेंशिया के लक्षण दिखने से 20 साल पहले ही अल्जाइमर रोग पहचाना जा सकता है।
रिसर्चर्स ने उस ‘खास’ फैट में कमी से अल्जाइमर रोग के विकास में रोकथाम की संभावना कही है।
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स्टडी रिसर्चर्स की मानें तो अल्जाइमर रोग 40 से 50 की उम्र में भी शुरू हो सकता है।
यह रोग याददाश्त और अन्य महत्वपूर्ण मानसिक कार्यों को नष्ट कर देता है।
लेकिन अधिक वजन और आंत की चर्बी घटाने से रोग पर ज्यादा कंट्रोल किया जा सकता है।
नई स्टडी में स्वस्थ दिमाग के 80 पुरुषों और महिलाओं (62%) को शामिल किया गया था।
उनकी औसत आयु लगभग 49 वर्ष और लगभग 56% मोटापा ग्रस्त थे।
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उनके दिमाग, शरीर, ग्लूकोज और इंसुलिन के साथ-साथ कोलेस्ट्रॉल लेवल की भी जांच हुई थी।
MRI स्कैन द्वारा पेट के नीचे और भीतरी अंगों के आसपास की चर्बी (visceral fat) को मापा गया।
निष्कर्षों में भीतरी चर्बी (visceral fat) के कारण एमिलॉयड (Amyloid) प्रोटीन की मात्रा अधिक थी।
मोटापे और अधिक आंतरिक फैट वालों के महत्वपूर्ण दिमागी क्षेत्रों में खून का दौरा कम देखा गया।
लेकिन अन्य प्रकार की फैट मोटापे से संबंधित अल्जाइमर रोग में वृद्धि करती नहीं मिली।
स्टडी ने अधिक visceral fat से अल्जाइमर रोग पैदा करने वाले प्रोटीन – Amyloid और tau – में वृद्धि बताई।
यह भी पता चला कि कमजोर इंसुलिन और कम एचडीएल दिमाग में अधिक Amyloid से जुड़े थे।
जबकि अधिक एचडीएल वालों में कम visceral fat से Amyloid के दुष्प्रभाव कुछ घट गए थे।
यह देखते हुए visceral fat में कमी के लिए मोटापा घटाने से अल्जाइमर जोखिम में कमी का अनुमान था।
स्टडी रेडियोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ नॉर्थ अमेरिका के एक आयोजन में प्रस्तुत की गई थी।