बॉडी मास इंडेक्स (Body Mass Index) मोटापा मापने का सर्वोत्तम तरीका नहीं है।
यह कहना है एक ग्लोबल कमीशन का जिसे दुनिया भर के 75 से अधिक मेडिकल संगठनों का समर्थन प्राप्त है।
मोटापे से संबंधित इस कमीशन में विश्व के 56 प्रमुख विभिन्न मेडिकल स्पेशलिस्ट शामिल है।
उन्होंने मोटापा तय करने में BMI के अलावा अन्य बातों का भी ध्यान रखने की सिफारिश की है।
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भ्रामकता से बचने के लिए नए मापदंड में लोगों का कमर साइज या बॉडी फैट मात्रा भी जानी जाएगी।
इसके अलावा, मोटापे में अब केवल BMI गणना ही नहीं, बल्कि कई स्वास्थ्य समस्याएं भी शामिल होंगी।
इससे स्वास्थ्य विशेषज्ञों को मदद की सर्वाधिक आवश्यकता वाले प्रभावितों की सटीक पहचान हो सकेगी।
मोटापे की दो नई कैटेगरी: (Two new categories of obesity)
मोटापा एक गंभीर रोग है। इससे डायबिटीज, हृदय रोग और कुछ कैंसर सहित अन्य समस्याएं हो सकती हैं।
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यह देखते हुए रिपोर्ट में क्लिनिकल मोटापा और प्री-क्लिनिकल मोटापा जैसी दो नई कैटेगरी पेश की गई हैं।
क्लिनिकल मोटापे की श्रेणी में हाई बीपी, हृदय रोग, लिवर, किडनी रोग, घुटने या कूल्हे के दर्द जैसी समस्या वाले होंगे।
अधिक वजन के ऐसे प्रभावितों का इलाज डाइट और एक्सरसाइज सहित मोटापा घटाने वाली दवाओं से किया जाएगा।
प्री-क्लिनिकल मोटापे में उपरोक्त बताई गई समस्याओं का खतरा तो होगा, लेकिन वर्तमान में कोई रोग नहीं होगी।
इसलिए, संभावित बीमारी का जोखिम कम करने के लिए अधिक वजन वालों को विशेषज्ञ मदद दी जाएगी।
मोटापे की सही स्थिति न पकड़ सकने के कारण भी BMI माप को दोषपूर्ण तरीका माना गया है।
नए मापदंड से क्लिनिकल मोटापे के पीड़ितों को समय पर साक्ष्य-आधारित उपचार मिलना संभव होगा।
इससे केवल वजन घटाने के बजाय उनके शरीर की अतिरिक्त चर्बी के कारण हुए शारीरिक नुकसान को भी सुधारा जा सकेगा।
यू.एस. रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्रों के अनुसार, दुनिया भर में लगभग 100 करोड़ लोग मोटापे से प्रभावित हैं।
नई कैटेगरी के आधार पर की गई मोटापा पीड़ितों की मदद उनके जीवन की गुणवत्ता में सुधार ला सकती है।
इस बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी नई रिपोर्ट से मिल सकती है।
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