प्रकृति (Nature) के संपर्क में रहना मानसिक स्वास्थ्य के लिए अच्छा है, ऐसा एक अध्ययन ने बताया है।
यही नहीं, कोरोना लॉकडाउन (Covid-19 Lockdown) के दौरान प्रकृति के बीच ज्यादा समय बिताने वालों को नकारात्मक प्रभाव कम करने में भी मदद मिली।
यह पुर्तगाल के विशेषज्ञों ने COVID-19 महामारी के दौरान हरे भरे स्थानों (Green Spaces) में आने वालों के विश्लेषण से पता लगाया है।
रिसर्च ने पुर्तगाल और स्पेन में लॉकडाउन के दौरान पार्क और समुद्र किनारे रहने या घूमने वालों और घरों के भीतर ही पेड़-पौधों की देखभाल में समय बिताने वालों में तनाव और मानसिक परेशानियों के लक्षण कम बताए।
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एनवायरनमेंट इंटरनेशनल पत्रिका में इस बाबत छपे शोध में, लॉकडाउन के दौरान प्रकृति संपर्क से मानसिक स्वास्थ्य पर हुए सकारात्मक प्रभावों का उल्लेख भी किया गया।
इसके लिए यूनिवर्सिटी विशेषज्ञों द्वारा स्पेन और पुर्तगाल में रहने वाले 18 वर्ष या उससे अधिक उम्र के सभी नागरिकों से ऑनलाइन कुछ सवाल पूछे गए।
दोनों देशों में कोरोना प्रतिबंधों के दौरान, सार्वजनिक प्राकृतिक स्थानों जैसे समुद्र तटों और पार्कों में टहलने जाने पर उल्लेखनीय कमी आई।
ऐसे में लोगों ने घर के पास पार्कों और घरेलू पौधों में ज्यादा समय बिताया। लेकिन पुर्तगाल के नागरिकों के मुकाबले स्पेनिश ने प्राकृतिक स्थानों पर जाने में ज्यादा कमी बताई।
स्पेन में जिन लोगों ने अपने पौधों की देखभाल में ज्यादा समय बिताया उनमें तनाव कम था।
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दूसरी ओर, घरों के पास ही हरी-भरी जगहों पर जाने वालों में मानसिक चिंता या दबाव का स्तर कम था।
उधर, प्राकृतिक स्थानों पर सैर करने जाने का नियम बनाए रखने वाले पुर्तगाली नागरिकों में भी, न जाने वालों की तुलना में, तनाव का स्तर कम दिखा।
जिन लोगों ने अपने घरों से ही पेड़-पौधों, बगीचों या समुद्र को देखा, उन्होंने भी मानसिक तनाव, विकार आदि में कमी बताई।
रिसर्च में जनसंख्या के मानसिक स्वास्थ्य की बेहतरी में प्राकृतिक स्थानों के लाभ की स्पष्ट रूप से पुष्टि हुई।
विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि महामारी प्रतिबधों को लगाते समय लोगों की मानसिक शांति के लिए सीमित मात्रा में प्राकृतिक स्थानों पर जाने की अनुमति दी जानी चाहिए।
इसके अलावा, शहरों की नई इमारतों में बालकनी या पेड़-पौधें रखने की जगह होनी चाहिए ताकि उनमें रहने वालों के स्वास्थ्य में गिरावट न हो।