एक नई स्टडी ने सल्फर युक्त सब्जियों को तेज आंच पर भूनने से मना किया है।
जापान की स्टडी ने वनस्पति तेल में तेज आंच पर लहसुन-प्याज भूनने से ट्रांस-फैटी एसिड बनने का खतरा बताया है।
बता दें कि ट्रांस-फैटी एसिड (Trans-fatty acids- TFA) खाने से दिल-संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ता है।
ये हानिकारक फैट धमनियों में जमा होकर खून का बहाव रोक देते है, जिससे हार्ट अटैक हो सकता हैं।
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विश्व स्वास्थ्य संगठन ने ट्रांस-फैटी एसिड से दुनिया भर में सालाना 278,000 से अधिक मौतें बताई है।
इसलिए, ट्रांस-फैटी एसिड को दैनिक ऊर्जा सेवन में 1% से कम खाने की सलाह है।
बाजार में मिलने वाले मार्जरीन, घी, बिस्कुट, केक आदि में ट्रांस-फैटी एसिड ज्यादा होते है।
हालांकि, वैज्ञानिक सबूत बताते हैं कि ये घर के पके खाने में भी मौजूद हो सकते है।
खासकर 150 डिग्री सेल्सियस या ज्यादा तापमान में पकने से वनस्पति तेल का अनसैचुरेटेड फैटी एसिड (UFA), ट्रांस-फैटी एसिड में बदल सकता है।
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तेज आंच में सब्जियों में मौजूद केमिकल्स भी उपरोक्त रासायनिक प्रतिक्रिया में वृद्धि कर सकते है।
ज्यादा जानकारी के लिए जापान के वैज्ञानिकों ने लहसुन, लीक, प्याज, हरे प्याज आदि सब्जियों के केमिकल की जांच की।
उन्हें खाना पकाने के दौरान उपरोक्त सब्जियों के केमिकल की UFA के ट्रांस-आइसोमेराइजेशन को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका मिली।
ट्रांस-आइसोमेराइजेशन (trans-isomerization) ऐसी रासायनिक प्रक्रिया है, जिसमें किसी केमिकल का रूप बदल जाता है।
सोयाबीन और ऑलिव जैसे तेलों में पकते समय लहसुन, प्याज, लीक, गोभी आदि का सल्फर ट्रांस-आइसोमेराइजेशन को बढ़ावा देता मिला।
ऐसा खाना पकाने का तापमान 140 डिग्री सेल्सियस से ऊपर होने पर पाया गया।
UFA आइसोमेराइजेशन घटाने में वनस्पति तेलों के एंटीऑक्सिडेंट अल्फा-टोकोफ़ेरॉल की भूमिका कुछ प्रभावी दिखी।
टीम ने वनस्पति तेलों में लहसुन-प्याज आदि को अधिक तापमान पर भूनने से ट्रांस-फैटी एसिड उत्पन्न होने की पुष्टि की।
सब्जियों के पॉलीसल्फाइड-प्रेरित आइसोमेराइजेशन को रोकने के लिए कम तापमान पर खाना पकाना आवश्यक कहा गया।
खाना पकाने के तरीकों को सुधार कर सल्फर युक्त सब्जियों द्वारा ट्रांस-फैटी एसिड बनाने को कम किया जा सकता है।
और जानकरी फ़ूड रिसर्च इंटरनेशनल में प्रकाशित स्टडी से मिल सकती है।
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