किसी व्यक्ति के चलने की गति से उसके संपूर्ण स्वास्थ्य की पहचान हो सकती है, यह कहना है डॉक्टरों का।
जापान के डॉक्टरों की स्टडी में, चलने की गति (walking speed) को हाई बीपी, डायबिटीज और डिस्लिपिडेमिया में कमी से जोड़ा गया है।
पिछली स्टडीज ने धीमे चलने को दिल की बीमारियों के विकास और बुजुर्गों में जल्द मौत के जोखिम से जुड़ा बताया था।
नई स्टडी में डॉक्टरों ने खासकर मोटापा ग्रस्त इंसानों की walking speed और उनकी बीमारियों के बीच संबंध का पता लगाया था।
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नतीजों के अनुसार, एक ही उम्र के इंसानों की तेज या धीमी चाल से उनके स्वास्थ्य को मापा जा सकता है।
स्टडी में मोटापे से ग्रस्त तेज चलने वाले इंसानों को हाई ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज आदि की संभावना कम मानी गई।
मोटापे से ग्रस्त हजारों पुरुषों और महिलाओं की जांच में, तेज़ चलने वालों को धीरे चलने वालों की अपेक्षा डायबिटीज का 30% कम खतरा था।
इसके अलावा, उनके हाई ब्लड प्रेशर और डिस्लिपिडेमिया (असामान्य कोलेस्ट्रोल/फैट) के जोखिम में भी छोटी, लेकिन उल्लेखनीय कमी थी।
स्टडी में तेज़ चलने वालों की कार्डियोरेस्पिरेटरी फिटनेस बेहतर बताई गई। यह फिटनेस कम सूजन और ऑक्सीडेटिव तनाव की सूचक है।
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गौरतलब है कि उपरोक्त लक्षण मोटापा, हाई बीपी, कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज आदि मेटाबॉलिक रोगों के दो प्रमुख चालक है।
डॉक्टरों के अनुसार, तेज़ चलने से मेटाबॉलिक रोगों के जोखिम में कमी और मानसिक स्वास्थ्य में वृद्धि हो सकती है।
नए निष्कर्षों की सटीकता और तेज चलने के पीछे छिपे स्वास्थ्यवर्धक तंत्र को समझने के लिए और खोज की आवश्यकता है।
इस बारे में अधिक जानकारी Scientific Reports जर्नल में छपी स्टडी से मिल सकती है।
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