Socialization benefits: एक स्टडी ने बुढ़ापे में बेहतर मानसिक स्वास्थ्य के लिए सामाजिक मेलजोल को महत्वपूर्ण पाया है।
यूएस स्टडी में, दिमागी स्वास्थ्य के लिए दोस्तों से मिलना, पार्टियों में जाना और अन्य सामाजिक गतिविधियों में हिस्सा लेना लाभकारी मिला है।
नतीजों से पता चला है कि सामाजिक गतिविधियों में व्यस्त रहने से बुढ़ापे के डिमेंशिया (Dementia) में देरी या रोकथाम में मदद मिल सकती है।
एक अनुमान के मुताबिक, डिमेंशिया रोग से दुनिया भर में पांच करोड़ से अधिक वयस्क प्रभावित है।
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पिछली रिसर्च बताती है कि सामाजिक जुड़ाव डिमेंशिया की रोकथाम का एक सरल तरीका हो सकता है।
नई स्टडी में पाया गया कि सामाजिक गतिविधियों में सबसे कम शामिल बुजुर्गों को सर्वाधिक वालों की तुलना में औसतन पाँच साल पहले डिमेंशिया हुआ।
स्टडी में लगभग 80 वर्ष की आयु के डिमेंशिया-मुक्त 1,923 बुजुर्गों की जांच की गई थी।
साढ़े छ: साल चली स्टडी में, कुल 545 बुजुर्गों को डिमेंशिया और 695 की दिमागी क्षमता में हल्की कमी हुई।
गहन जांच के बाद, सामाजिक रूप से अधिक सक्रिय बुजुर्गों में डिमेंशिया रोग की दर कम देखी गई।
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निष्कर्ष बताते हैं कि अधिक सामाजिक गतिविधियों वालों के डिमेंशिया जोखिम में 38% की कमी जानी गई।
यही नहीं, सामाजिक रूप से कम सक्रिय लोगों की अपेक्षा उनकी दिमागी क्षमता गिरावट में 21% कमी थी।
इसके अलावा, उनकी डिमेंशिया शुरुआत में पाँच साल की देरी से जीवन के अतिरिक्त तीन साल और बढ़ने का अनुमान था।
स्टडी की मानें तो सामाजिक गतिविधि से दिमाग के न्यूरॉन्स उम्र बढ़ने के बावजूद बीमारियों के विरुद्ध मजबूत बने रहते है।
सामाजिक मेलजोल सोच और याददाश्त में शामिल दिमाग के खास हिस्सों को सक्रिय रखता है।
उपरोक्त जानकारी, रश यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर की अल्जाइमर एन्ड डिमेंशिया जर्नल में छपी स्टडी से मिली है।
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