स्वास्थ्य उत्तम रखने में उपवास (Fasting) को सहायक माना गया है।
पोषण विज्ञान में स्वास्थ्य के लिए कई तरह के उपवास लाभकारी बताए गए है।
हालांकि, उनमें से कौन सा अधिक प्रभावी है, इसकी निरंतर खोज चलती रहती है।
इस दिशा में ताइवान की एक यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों ने अहम जानकारी दी है।
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उन्होंने तीन प्रमुख इंटरमिटेंट फास्टिंग का असर जानने के लिए 9,800 से अधिक इंसानों पर हुई 153 स्टडीज का विश्लेषण किया था।
ये इंटरमिटेंट फास्टिंग थी: समय-प्रतिबंधित भोजन (time-restricted eating), एक दिन छोड़कर उपवास (alternate-day fasting), और पांच दिन भोजन- दो दिन उपवास (5:2 diet).
उपरोक्त इंटरमिटेंट फास्टिंग के प्रभावों की तुलना निरंतर कम खाने और सामान्य आहार से की गई थी।
इससे स्टडीज में शामिल लोगों के शारीरिक वजन, ब्लड प्रेशर, ब्लड ग्लूकोज और कोलेस्ट्रॉल पर असर जाना गया।
विश्लेषण में तीनों इंटरमिटेंट फास्टिंग ने सामान्य आहार की तुलना में शरीर के वजन को काफी कम किया।
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इंटरमिटेंट फास्टिंग के तहत दिन के सीमित घंटों में खाना, जबकि बाकी घंटों में उपवास रखना पड़ता है।
भोजन व कम कैलोरी की अपेक्षा इंटरमिटेंट फास्टिंग ने मेटाबॉलिक स्वास्थ्य पर क्रमश: 85.4% और 56.1% बेहतर असर डाला।
इंटरमिटेंट फास्टिंग में भी ‘एक दिन छोड़कर उपवास’ (alternate-day fasting) से शारीरिक समस्याओं में ज्यादा सुधार हुआ।
नतीजों के आधार पर शारीरिक समस्याओं को सुधारने में इंटरमिटेंट फास्टिंग एक प्रभावी उपाय माना जा सकता है।
नेशनल ताइवान यूनिवर्सिटी की यह स्टडी BMC मेडिसिन में प्रकाशित हुई थी।