शाकाहारी दूध (Plant-based milk) गाय के दूध जितना स्वास्थ्यवर्धक नहीं होता है।
यह कहना है इटली और डेनमार्क के स्वास्थ्य संस्थानों की एक साझा स्टडी का।
स्टडी में ओट्स, बादाम और सोया से बने दूध में गाय के दूध की अपेक्षा कम प्रोटीन और पौष्टिक तत्व कहे गए है।
यही नहीं, फैक्ट्रियों में शाकाहारी दूध बनाते समय हुई रासायनिक प्रतिक्रियाओं से कैंसर भी हो सकता है।
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इस चौंकाने वाली जानकारी के लिए संस्थानों के विशेषज्ञों ने 10 विभिन्न पौधों से बने दूध की जांच की थी।
उन्होंने रासायनिक प्रतिक्रियाओं से गुजरे सभी दूध की गाय के दूध में मौजूद पौष्टिक तत्वों से तुलना की।
जांच में पाया गया कि लंबे इस्तेमाल के लिए पौधे से बने दूध को गाय-दूध की अपेक्षा अधिक गर्म किया जाता है।
अल्ट्रा-हाई टेम्परेचर (UHT) की इस प्रक्रिया में प्रोटीन और चीनी के बीच एक केमिकल रिएक्शन होता है।
‘Maillard reaction’ नामक इस प्रतिक्रिया से प्रोटीन की पोषण गुणवत्ता (nutritional quality) कम हो जाती है।
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‘Maillard reaction’ में कमी के लिए प्रोडक्ट्स को रूम टेम्परेचर के बजाए फ्रिज में रखने की सलाह दी गई है।
ज्यादा गर्मी झेलने से शाकाहारी दूध में मौजूद कम प्रोटीन के ‘कुछ आवश्यक अमीनो एसिड’ भी खत्म हो जाते है।
फैक्ट्रियों में हुई अल्ट्रा-हाई टेम्परेचर प्रक्रिया विशेष रूप से कैंसर पैदा करने वाले तत्व भी पैदा कर सकती है।
यह बादाम और ओट्स से बने चार पौधे-आधारित दूध में एक्रिलामाइड (Acrylamide) मिलने के बाद पता चला है।
Acrylamide ऐसा कार्सिनोजेन (carcinogen) है, जो ब्रेड, कुकीज़, कॉफी बीन्स और फ्रेंच फ्राइज़ में भी पाया जाता है।
हालांकि, उपरोक्त प्रोडक्ट्स में कैंसरजनक Acrylamide कम मात्रा में पाया गया, जिससे कोई खतरा नहीं है।
लेकिन विभिन्न स्रोतों के सेवन से बढ़ा इसका स्तर स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है।
इसलिए, विशेषज्ञों ने फैक्ट्रियों में बने प्रोडक्ट्स की बजाए सुरक्षित, प्राकृतिक भोजन खाने की सलाह दी है।
इस बारे में और जानकारी Food Research International जर्नल में छपी स्टडी से मिल सकती है।